नवरात्र विशेष
शक्तिपीठ - दर्शन
भारत वर्ष में शक्ति साधना के कुछ विशिष्ट स्थल है जो शक्ति पीठ के नाम से जाना जाता है | अध्यात्म की खोज में लगे लोग एक न एक बार अवश्य ही इन शक्ति पीठो का दर्शन करता है |पौराणिक आख्यानो के अनुसार दक्षप्रजापति के यज्ञ में भगवान शंकर को आमंत्रित न करने के कारण भगवती सती यज्ञ में अपने शरीर का परित्याग करके यज्ञ- विध्वंस कर दिया | भगवान शंकर सतीक की देह को अपने कंधे पर रखकर नृत्य करते हुए पृथ्वी पर भ्रमण करने लगे | पराम्बा भगवती के चिन्मय अंग ५१ स्थानों पर गिरे | उनमे २१ प्रमुख शक्तिपीठ- काशी का श्री विशालाक्षी शक्तिपीठ
- कामरूप नीलांचल कामख्या शक्ति पीठ
- कन्याकुमारी शक्तिपीठ
- कुरुक्षेत्र भद्रकाली शक्तिपीठ
- पश्चिम तिब्बत स्थित शक्तिपीठ
- आद्याशक्ति और नेपालशक्तिपीठ-गुहोश्र्वोरीदेवी
- माँ कल्याणी (ललिता ) शक्तिपीठ -प्रयाग
- क्षीर ग्राम शक्तिपीठ
- करतोयातट शक्तिपीठ
- कात्यायनी शक्तिपीठ
- चामुण्डा मथुरा शक्तिपीठ
- आरासुरी अम्बाजी शक्तिपीठ -गुजरात
- ज्वालाजी शक्तिपीठ -हिमाचल
- महामाया पाटेश्वरी शक्तिपीठ-देवीपाटन
- श्रीसिध्द्पीठ माता हरसिध्द मंदिर -उज्जैन
- श्रीमाता त्रिपुरेश्वेरी शक्तिपीठ -त्रिपुरा
- हृदयपीठ-वैद्यनाथधाम
- श्रीभद्र्कालिदेवी शक्तिपीठ -जनस्थान (नासिक )
- उत्कल देश शक्तिपीठ -विरजा और विमला
- माँ तारा चंडी शक्तिपीठ-सासाराम
- करवीर शक्तिपीठ -कोल्हापुर
धन्यवाद

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